Tue. Sep 27th, 2022

नीम मानव जीवन को रोग मुक्त करने मेंबहुत सहयोगी वृक्ष है । जिसका हरभाग मानव शरीर की रक्षा में कामआता है । यह वृक्ष काफी लम्बा और फैलाहोता है । इसके पत्ते कड़वे होते हैं ।इसका फल अपने अन्दर मीठापन लिये होता है । इसकी छाल, पत्ते,फल, फूल सभी काम आते हैं । इसके बीजों को निमोली कहते हैंजिनसे तेल निकलता है । अप्रैल, मई में पुष्प खिलते हैं तथा इसकेबाद फल बनते हैं ।इसकी छाल के चूर्ण को खाने के लिए 1 से 2 मि.गा। तेल काप्रयोग 4 से 10 बूँद तक ।

नीमका लाभ

  • चर्म रोगों में नीम के पत्तों का तथा फलों का बना चूर्णलाभदायक होता है । ऐसे लोगों को नीम के पत्ते उबालकर उस पानी से स्नान करने से लाभ होगा ।
  • खून में खराबी तथा वात में पटोलपत्र तथा नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर शहद के साथ सेवन करने पर लाभ होगा ।
  • कामला रोग में नीम के पत्ते के स्वरस को शहद के साथ सेवन करने से लाभ होगा ।
  • शरीर के किसी भाग में भी दर्द हो तो नीम का तेल लगायें । हर प्रकार के फोड़े फुन्सियों में इस तेल को लगाने से लाभ मिलेगा ।
  • संधि शोथ एवं आमवात में इसके तेल की मालिश करनी चाहिए ।
  • इसके पुराने वृक्षों से स्वयं द्रव रस निकलता है जिसे नीमताडी कहते हैं । इसका उपयोग औषधी बनाने में होता है ।

महानिम्ब ( बकायन, डिकडेकन)(Melia Azedarach) द्वारा रोगों का उपचार

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