Tue. Sep 27th, 2022

इसके छोटे कद के गुल्मनुमा वृक्ष होते हैं । जो नारियल के पेड़ की भांति सीधे खड़े रहते हैं । इनमें फल बहुत आते हैं।पपीते को हरे रंग में ही उतारकर उसे कुछ दिन कमरे में बन्द रखते हैं । यहाँ पर उसका रंग पीला पड़ जाता है । हरा, पीला रंग पके हुये पपीते की निशानी है । जो अन्दर से हल्का लाल गुलाबी तथा पीला होता है। इसके अन्दर काले बीज होते हैं । पपीते पर अगस्त-सितम्बर में फूल आते हैं। सर्दी में फल पककर तैयार हो जाते हैं। लाभकारी अंग जड़, फल, पत्ते हैं। यह पूरे भारत वर्ष में पैदा होता है ।

लाभ तथा उपचार

  • रस मधुर, वीर्य-उष्ण, विपाक-मधुर, कर्म-त्रिदोषघ्न, जिगर की खराबी को दूर करें । पेट रोग के लिये उपयोगी ।
  • पुरानी कब्ज में हर रोज सुबह उठकर 250 ग्राम पपीता खाने से यह रोग जड़ से चला जाता है ।
  • बीजों को गर्भपात में प्रयोग किया जाता है ।

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